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भारतीय सीमेंट उद्योग ने बनाया रोडमैप

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Rajan

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11/29/2018 9:32:30 PM

चंडीगढ 29 नवंबर: देश के सीमेंट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएमए) ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समर्थन से पहले राष्ट्रीय कंक्रीटेक 2018 सम्मेलन का आयोजन किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि हरदीप सिंह पुरी, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री ने सतत प्रतिस्पर्धा के साथ ‘राष्ट्र के निर्माण’ में सीमेंट उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका का विस्तृत खाका खींचा। सम्मेलन में अहम नीति निर्माता, अर्थशास्त्री, उद्योग जगत के अग्रणी लोग एक मंच पर आए और सतत विकास लक्ष्यों (2030) के प्रति प्रतिबद्धता एवं इसे हासिल करने में सीमेंट उद्योग की भूमिका से जुड़े अहम मसलों पर अपने विचार साझा किए। इस मौके पर माननीय मंत्री ने कहा, मैं सीएमए को इस 56वीं एजीएम के लिए बधाई देता हूं और मैं मानता हूं कि राष्ट्र निर्माण में सीमेंट की सीधी और मजबूत भूमिका है। इससे भारत को न केवल एसडीजी 2025 के लक्ष्यों को बल्कि 2030 के विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। सीएमए के प्रेसीडेंट और जेके लक्ष्मी सीमेंट के पूर्णकालिक निदेशक डॉ. शैलेंद्र चौकसे ने कहा, भारत में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उद्योग है। 250 बड़े सीमेंट प्लांट के साथ यहां कुल 50 करोड़ टन सीमेंट उत्पादन की क्षमता है। यह वैश्विक सीमेंट उत्पादन क्षमता के 8 फीसद से ज्यादा है। इस मौके पर सीएमए के वाइस प्रेसीडेंट और डालमिया सीमेंट्स के प्रबंध निदेशक महेंद्र सिंघी ने कहा, महत्वपूर्ण यह भी है कि नई प्रौद्योगिकी, नवीनतम गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण प्रक्रियाएं, ऊर्जा बचत, निम्न कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण अनुकूल लक्ष्य के साथ देश का सीमेंट उद्योग सतत प्रतिस्पर्धा की स्थिति में है। भारतीय सीमेंट उद्योग की 50 फीसद क्षमता पिछले 10 साल से कम समय में जुड़ी है। सीएमए की महासचिव अपर्णा दत्त शर्मा ने कहा, कंक्रीटेक 2018 देश व विदेश के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधियों और वक्ताओं को एक मंच पर लेकर आया है। इसमें सतत विकास को विशेषरूप से केंद्र में रखते हुए भारतीय सीमेंट उद्योग के सभी संबंधित पक्षों की साझा चिंताओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।