• 8/26/2019

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राज्यपाल आर्य को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने पीएच.डी की मानद उपाधि से किया सम्मानित

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Dr.Kumar

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1/10/2019 9:07:44 PM

चण्डीगढ़, 10 जनवरी। विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर बुधवार को हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा पटना में आयोजित सम्मेलन में पीएच.डी (विद्या वाचस्पति) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिन्दी के सम्मान में यह आयोजन किया गया। राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने बिहार में संस्कृत व हिन्दी के विकास के लिए जो सराहनीय कार्य किया, उसी की बदौलत आज उन्हे डाॅक्टरेट की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज, बिहार हिन्दी साहित्य के अध्यक्ष डा0 अनिल सुलभ व रिर्जव बैंक आॅफ इंडिया के निदेशक नेलन प्रकाश तोपनो बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष श्री विजय प्रकाश सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य नालंदा जिले के राजगीर विधान सभा क्षेत्र से आठ बार विधायक रहे है। इसके साथ-साथ उन्होने ने दो बार कैबिनेट मंत्री के पद को सुशोभित किया है। अपने बाल्यकाल से ही उन पर आर्य समाज के विचारों का प्रभाव रहा है और उन्होने 1972 में राजगीर से ही चुनाव लड़ने की शुरूआत की। इसके बाद उन्होने राजनैतिक के क्षेत्र में पीछे मुड़कर नही देखा और एक ही पार्टी से आठ बार विधायक चुने गए। श्री आर्य ने अपने राजनैतिक जीवन में राजगीर सहित पूरे बिहार में ग्रामीण विकास, शिक्षा और गरीबोत्थान के लिए काम किया और इसी वजह से क्षेत्र के गरीब लोगों ने उनको मसीहा माना है। पीएच.डी की उपाधि दिए जाने पर उन्होने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा गठित बिहार साहित्य सम्मेलन का धन्यवाद किया और विश्व हिन्दी दिवस पर देश के सभी साहित्यकारों को बधाई दी। इस सम्मेलन में देश और विदेश से संस्कृत व हिन्दी के प्रकाण्ड़ पंडित व साहित्यकार उपस्थित थे। उन्होनेे हिन्दी के विकास और भाषा को आगे बढ़ाने के लिए डा0 राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के योगदान को याद किया और कहा कि ऐसे साहित्यिक पूरोधाओं के कारण ही हिन्दी भाषा का अस्तित्व बचा और आज हिन्दी भाषा विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर है। आर्य ने कहा कि देश में मुगलों और अंग्रेजों के शासन काल में हिन्दी भाषा ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन हिन्दी साहित्य प्रेमियों के संघर्ष के चलते हिन्दी भाषा ने निरंतर विकास किया। उन्होने कहा कि हिन्दी के विकास के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने ‘‘सत्यार्थ-प्रकाश‘‘ को हिन्दी भाषा में प्रकाशित किया। ‘‘सत्यार्थ प्रकाश‘‘ में वेदों का सार है और आर्य समाज का आधार ग्रंथ है। उन्होने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने जनता की आवाज को सुन कर 14 सितम्बर 1949 को संविधान की अनुछेद 343 में शामिल कर हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भी 1957 में हिन्दी के लिए आंदोलन हुआ। तत्कालीन हिन्दी आंदोलन में भाग लेने वाले आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया गया और आज उन्हे मासिक पेंशन भी प्रदान की जा रही है। आर्य ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में भाषण देकर हिन्दी प्रेमियों का मस्तक उचां किया। इसी प्रकार से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में फिर से संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में ही धाराप्रवाह संबोधन किया। उन्होने आमजन से अपील की कि हम सब हिन्दी के विकास के लिए आगे आए और हम सब दिन-प्रतिदिन के कार्यों में हिन्दी का प्रयोग करें।