• 6/17/2019

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रोजगार क्रान्ति में अब होगा आर-पार का संघर्ष, 26 फ़रवरी को जंतर मंतर पर होगा प्रदर्शन

Manoj Sharma

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2/23/2019 8:49:29 PM

दिल्ली, 23 फरवरी। रोजगार की गारन्टी संविधान में सभी नागरिकों को प्रदान किया है लेकिन सरकारें इस अधिकार को देनें में विफल रहीं हैं। कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस देश में फावड़ा चलानें वाले मजदूर को तो मनरेगा रोजगार गारन्टी प्रदान कर दी गई परन्तु शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार की गारन्टी देनें के बारे में न तो केंद्र सरकार और न ही प्रदेश सरकार गंभीर है, शिक्षित बेरोजगारों को पढ़ लिख कर भी कोई काम न मिल पानें से तमाम नौजवानों को निराशा, अवसाद यहाँ तक कि सैकड़ों आत्महत्या कर चुके हैं | राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी के उपाध्यक्ष अनिल मिश्रा नें जारी एक बयान में बताया कि सरकार शिक्षा को प्रोत्साहित करनें के बजाएं फावड़ा चलानें और मजदूरी करनें को प्रोत्साहित करती है बल्कि सरकारों नें ये स्थिति ला दिए हैं कि “रोटी चाहिये तो फावड़ा चलाओ” सरकार शिक्षित युवाओं को रोजगार की गारन्टी न देकर शिक्षा को हतोत्साहित करनें का काम कर रही है परन्तु राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदत्त अधिकार शिक्षित युवाओं को दिलानें के लिए आन्दोलन अनवरत कर रही है अब क्रांति में तेजी लाकर शिक्षित युवाओं को इन्साफ दिलाया जायेगा | जनहित में संघर्षरत राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी 2014 से “रोजगार- क्रान्ति” अभियान चला रही है जिसके तहत शिक्षित बेरोजगारों को भी मनरेगा की तर्ज पे 120 दिन की रोजगार गारन्टी लागू हो जिससे शिक्षित बेरोजगार सम्मान की जिन्दगी गुजार सकें। इसे आर-पार की लड़ाई लड़ने हेतु आज रणनिति बनाई गई। पहले अभियान से लोगों को जोडनें के लिए विभिन्न माध्यम से हस्ताक्षर अभियान चलाकर युवाओं को जागरूक किया गया जिससे इस मांग को बल मिल सके। अब राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष लोकेश कुमार मास्टरजी के नेतृत्व में तमाम शिक्षित युवा सोमवार 26 फ़रवरी को दोपहर 1 बजे दिल्ली के जंतर मंतर पर इकठ्ठा होकर सरकार से मांग किया जायेगा कि शिक्षित बेरोजगारों के लिए रोजगार की गारन्टी सुनिश्चित करे। विदित हो कि चुनाव आयोग नें सभी विभागों से लोकसभा चुनाव हेतु लगभग 9 लाख कर्मचारियों की सूची मांगी है, कर्मचारियों को उन्हें उसी जगह काम करने दीजिये बल्कि बेरोजगारों को चुनाव ड्यूटी लगाकर काम लीजिये जिससे लगभग 9 लाख बेरोजगारों के मरहम लग सके जो न्यायपूर्ण भी है |