• 3/27/2019

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धूम्रपान करने वाले को टोकना, रोकना भी धूम्रपान न करने जितना आवश्यक: प्रो. चौहान

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Preeti

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3/13/2019 9:21:37 PM

करनाल, 13 मार्च। आज के इस प्रदूषण युक्त युग में हमारी जिम्मेदारी केवल खुद को धूम्रपान मुक्त रखने तक ही सीमित नहीं है अपितु हर धूम्रपान करने वाले को टोकने, रोकने और उसको उसके इस कृत्य के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर उसे अपनी जमात में शामिल करने की भी है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष व भाजपा नेता प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने ग्रामोदय संस्थान के तत्वाधान में नगर के प्रतिष्ठित डी. ए. वी. कॉलेज के सभागार में धूम्रपान निषेध दिवस के उपलक्ष में आयोजित नवीन भारत शिक्षण संवाद कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षाविदों व विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. आर. पी. सैनी ने की । प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि धूम्रपान करने वाला व्यक्ति केवल अपने ही स्वास्थ्य का नुकसान नहीं करता अपितु अपने आसपास उपस्थित सभी लोगों के स्वास्थ्य को भी अप्रत्यक्ष रूप से बहुत घातक नुकसान पहुंचाता है । धूम्रपान शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक है क्यूँकि इसके चलते कई प्रकार के कैंसर सहित बहुत सारी बीमारियाँ होने के वैज्ञानिक प्रमाण हैं । स्वास्थ्य के साथ साथ वातावरण को दूषित करने में भी उसका बहुत बड़ा योगदान रहता है। प्रो. चौहान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ, जोशीला और ऊर्जावान युवा ही देश को प्रगति की राह पर ले जा सकता है अगर युवा नशे की लत में पड़ गया तो अंतत यह देश का ही नुकसान है । अतः खुद को नशे व धूम्रपान से दूर रखना और अपने साथियों, संबंधियों को नशे से दूर रखने का प्रयास करना भी नवीन भारत के निर्माण का एक अंग है । धूम्रपान करने वाले इसके चंगुल से बाहर आने का संकल्प लें और साथ ही हम सब मिल कर सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों को कड़ाई से रोकें। ये प्रण लेना ही आज के दिवस को सफल बनाएगा । विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों में का उत्तर देते हुए प्रोफेसर चौहान ने हुक्के का प्रयोग संस्कृति का वाहक है विषय पर विद्यार्थियों को कहा मूल रूप से किसी भी प्रकार का धूम्रपान भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है । हुक्के का प्रयोग तो परंपराओं में एक कुरीति की भांति प्रविष्ट हो गया था। जिस प्रकार हमने पर्दा प्रथा, नारी अशिक्षा व सती प्रथा आदि कुरीतियों को कालांतर में अपने समाज से उखाड़ फेंका है उसी प्रकार हमें धुम्रपान की कुरीति को भी हटाना है। चाहे वह बीड़ी सिगरेट के रूप में हो या हुक्के के रूप में । कार्यक्रम में ग्रामोदय संस्था के महामंत्री अनिल सिंघानिया ने ग्रामोदय का परिचय देते हुए कहा जब तक हम गांवों के विकास को तरजीह नहीं देंगे तब तक देश पूर्ण रूप से विकसित नहीं होगा । महानगरों में बन रहे इंडिया व गांवों में बसे भारत के बीच की दूरी को पाटना होगा और शिक्षा स्वास्थ्य व रोजगार की सुविधाओं का स्तर गांवों में भी बढ़ाना होगा अन्यथा गांव से होता निरंतर पलायन शहरों की समस्याओं को भी बढ़ाएगा । अंत में विभिन्न विद्यार्थियों ने नवीन भारत को लेकर अपने सुझाव दिए व प्रश्न भी पूछे जिनका मुख्य अतिथि प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने आकर्षक ढंग से समाधान प्रस्तुत किया । अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. आर. पी सैनी ने सभी विद्यार्थियों का आवाहन किया कि धूम्रपान मुक्त समाज का संकल्प लें जिससे आने वाली पीढ़ी को ज्यादा बेहतर माहौल दिया जा सके । उन्होंने अपनी युवावस्था के अनुभव विद्यार्थियों से साझा करते हुए उन्हें धूम्रपान न करने और अपने साथियों की धूम्रपान की आदत छुड़ाने के लिए प्रेरित किया । कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. मीनाक्षी, डॉ. सुलोचना, डॉ. अवनीश बुद्धिराजा, डॉ. अंशु जैन, डॉ. जितेंद्र, डॉ. विजय, डॉ. रेखा चौधरी, डॉ. मोनिका, प्रेरणा, ज्योति, अनामिका, सपना, अंजू, रुचि, अनीता, प्रियंका, बलराम, विपिन व पूनम आदि का सक्रिय सहयोग रहा।