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हिमालय के दो-तिहाई ग्लेशियर खतरे में: भिक्खू संघसेना

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Varsha

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3/26/2019 9:28:49 PM

चंडीगढ़, 26 मार्च । एक नये अध्ययन में साफ हुआ है कि यदि विश्व में उत्सर्जन का यही हाल रहा तो 2100 तक हिमालय के दो-तिहाई ग्लेशियर पिघल जायेंगे। यदि पेरिस समझौते के लक्ष्य के अनुरूप वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की कमी लायी जाती है, तो भी ग्लेशियरों को यह नुकसान तो झेलना ही पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों में लगभग 25 करोड़ लोगों के लिए और नदी घाटियों में 1.65 अरब लोगों के लिए जल स्रोत मौजूद हैं। ग्लेशियर गंगा और सिंधु सहित दुनिया की 10 सबसे महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों को पानी देते हैं, और भोजन, ऊर्जा, स्वच्छ हवा तथा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आय के रूप में अरबों लोगों के जीवन को सहारा देते हैं। इस बारे में बात करते हुए, सेव दि हिमालया फाउंडेशन, लेह-लद्दाख के संस्थापक, भिक्खू संघसेना ने कहा, 'ग्लेशियर पिघलने से लोगों पर कई तरह से प्रभाव पड़ेगा, जैसे कि वायु प्रदूषण बढ़ेगा और मौसम में बहुत अधिक बदलाव होगा। नदियों का जल प्रवाह प्रभावित होने से शहरी जल प्रणालियां संकट में आयेंगी और भोजन व ऊर्जा उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।' हिमालय के ग्लेशियर, जो लगभग 7 करोड़ वर्ष पहले बने थे, बदलते तापमान के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। 1970 के दशक के बाद से, वे पतले हुए हैं और पीछे हट रहे हैं। हिमालय के जो क्षेत्र कभी बर्फ से लकदक रहते हैं, उनके क्षेत्रफल में तेजी से कमी आयी है। जैसे-जैसे ग्लेशियर सिकुड़ते जा रहे हैं, सैकड़ों खतरनाक ग्लेशियल झीलें फट सकती हैं और बाढ़ ला सकती हैं। सैटेलाइट डाटा से पता चलता है कि 1990 में 3,350 से बढक़र ऐसी झीलों की संख्या अब 4,260 हो गयी है। यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में दी गई।