• 7/24/2019

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सभी धार्मिक ग्रन्थों का मुख्य उद्देश्य ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना: सी.एल.गुलाटी

Surinder Kumar

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4/8/2019 10:58:22 PM

चण्डीगढ़ 8 अप्रैल। चण्डीगढ़ के जाने माने पुरातन निरंकारी महात्मा गोपाल कृष्ण मलहोत्रा जो दिनांक 5 अप्रैल को दोपहर 3ः10 पर अपने नश्वर शरीर को त्याग कर ब्रह्मलीन हो गए थे आज उनके जीवन से प्रेरणा लेने के लिए यहां सैक्टर 30-ऐ में स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया जिसमें देहली से आए सन्त निरंकारी मण्डल के सचिव सी.एल.गुलाटी ने बताया कि मलहोत्रा जी ने ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने के बाद सभी धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन किया और फिर यह पाया कि जो ब्रह्मज्ञान उन्हें निरंकारी मिशन द्वारा प्रदान किया गया है वास्तव में हर धार्मिक ग्रन्थ का सार और उद्देश्य भी यही है कि इन्सान जीते जी वर्तमान सत्गुरू की शरण में जा कर इस परमपिता परमात्मा की जानकारी हासिल करके अपनी भक्ति आरम्भ करे । इससे उनका विश्वास इतना दृढ हो गया कि एक ही सप्ताह के अन्दर-अन्दर न केवल अपनी धर्मपत्नी बल्कि सभी बच्चों को भी सत्गुरू की शरण में ला कर इस ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति करवा दी व उन्हें हर समय तत्कालीन और वर्तमान सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज के चरणों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते रहे । उन्होंने हर समय हर परिस्थिति में इस सर्वव्यापी परमात्मा का सिमरन करते हुए इसका सहारा लिया और चरणामृत ग्रहण करते हुए अन्तिम स्वांस ली । गोपाल कृष्ण मलहोत्रा ने परमपिता परमात्मा की जानकारी वर्ष 1973 में तत्कालीन सत्गुरू बाबा गुरबचन सिंह के समय में ज्ञान प्रचारक सोहन लाल नन्दा से एस. के. सोनी एवं रामगोपाल शर्मा द्वारा दी गई प्रेरणा से प्राप्त किया । मलहोत्रा पंजाब सरकार के उद्योग विभाग में बतौर उप महाप्रबन्धक के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 1992 में सेवानिवृत्त हुए । वे सन्त निरंकारी मासिक पत्रिका में अपना योगदान नियमित रूप से अपने लेखों द्वारा देते रहे, उनका अन्तिम लेख ैंजहनतन ठमेजवूमत व िक्पअपदम ज्ञदवूसमकहम सन्त निरंकारी मण्डल द्वारा अप्रैल, 2019 की पत्रिका में प्रिन्ट किया गया तथा इस पत्रिका को श्रद्धांजलि समारोह के बाद सभी उपस्थित सदस्यों में वितरित किया गया । वे शेर-ओ-शायरी में बहुत रूचि रखते थे जिसकारण उन्होंने ‘गुलदस्ता’ नाम की पुस्तक लिखी गई जिसमें हर तरह के भाव अर्थात अध्यात्मिक, सामाजिक, मानवता व सुख-दुख से सम्बन्धित भावों को कलमबन्द किया। मलहोत्रा परिवार दिवान टोडर मल मलहोत्रा के वंशज से चला आ रहा है । मलहोत्रा जी ने अपने परिवार के सदस्यों के सम्मुख यह इच्छा व्यक्त की कि उनके ब्रह्मलीन होने पर उनके नेत्र किसी नेत्रहीन को नेत्र ज्योति प्रदान करने के लिए दान कर दिए जायें । इसके अतिरिक्त पर्यावरण हेतु उन्होंने यह इच्छा व्यक्त की कि उनके पार्थव शरीर का अन्तिम संस्कार सी.एन.जी. शवदाहगृह में किया जाए । उनके परिवार ने उनकी इच्छा अनुसार उनके नेत्र दान किए व उनका अन्तिम संस्कार भी सी.एन.जी. शवदाहगृह में निरंकारी मिशन की मर्यादा अनुसार किया ।