• 7/22/2019

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पर्यावरण फैशन नहीं पैशन होगा चाहिए: प्रदीप त्रिवेणी

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Preeti

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4/22/2019 9:00:32 PM

चण्डीगढ़, 22 अप्रैल । पृथ्वी दिवस के अवसर पर सोमवार को खेल विभाग पंजाब यूनिवर्सिटी चंणडीगढ़ में त्रिवेणी संस्था की तरफ से पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्यातिथि खेल विभाग के निदेशक डॉ. परमिंदर सिंह और विशिष्ट अतिथि डॉ. अब्दुल कयूम, आई.एफ.एस., डिप्टी कंजरवेटर फॉरेस्ट चंडीगढ़ शामिल हुए। इस मौके पर त्रिवेणी के फाउंडर प्रदीप त्रिवेणी ने कहा कि हमें पर्यावरण को फैशन नहीं बल्कि पैशन के तौर पर लेना चाहिए तभी हम पर्यावरण को सुरक्षित रख पाएंगे। डॉ. परमिंदर सिंह ने कहा एक प्रसिद्ध कहावत है कि "कल्पना कीजिए कि अगर पेड़ वाईफाई सिग्नल देते तो हम कितने सारे पेड़ लगाते, शायद हम ग्रह को आसानी से बचा पाते। कितना दुखद है कि हम प्रौद्योगिकी के इतने आदी हो गए हैं कि हम अपने पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों की अनदेखी करते हैं। न केवल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल प्रकृति को नष्ट कर रहे है बल्कि यह हमें उससे अलग भी कर रहा है। डॉ अब्दुल कयूम डिप्टी कंजरवेटर फॉरेस्ट चंडीगढ़ उन्होंने कहा कि अगर हम वास्तव में जीवित रहना चाहते हैं और अच्छे जीवनयापन करना चाहते हैं तो अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए। ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ने के अलावा पेड़ पर्यावरण से अन्य हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं जिससे वायु शुद्ध और ताज़ी बनती है। जितने हरे-भरे पेड़ होंगे उतना अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन होगा और अधिक विषैली गैसों को यह अवशोषित करेंगे। प्रदूषण का स्तर इन दिनों बहुत अधिक बढ़ रहा है। इससे लड़ने का एकमात्र तरीका अधिक से अधिक पेड़ लगाना है। उदाहरण के लिए पेड़ों से घिरे क्षेत्र, गांव और जंगल शुद्ध पर्यावरण को बढ़ावा देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये कम प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्र हैं। दूसरी ओर शहरी आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में खराब प्रदूषण और कम पेड़ों की संख्या के कारण वायु की गुणवत्ता खराब है। वहीं लोगों को जागरूक करते हुए चंडीगढ़ के डिप्टी कंजरवेटर फॉरेस्ट, डॉ. अब्दुल कयूम, आई.एफ.एस. ने बताया कि पृथ्वी की प्राकृतिक संपत्ति को बचाने के लिये 22 अप्रैल 1970 से ही पृथ्वी दिवस को पूरी दुनिया के लोग मनाते आ रहें हैं और हम सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय मुद्दों, औद्योगिकीकरण, वन कटाई आदि पर आधारित भूमिका प्रदर्शित करने के लिये सड़कें और पार्कों को व्यस्त रखतें हैं। दिनों-दिन पर्यावरणीय ह्रास, वायु और जल प्रदूषण, ओजोन परत में कमी आना, औद्योगिकीकरण, वन-कटाई आदि से तेलों का फैल जाना, प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरी को तैयार करना, पावर प्लॉन्ट, कीटनाशकों के उत्पादन के इस्तेमालों ने एक ज्वलंत समस्या का रुप ले लिया है हमें इस विभीषिका से अपने साथ-साथ प्रकृति को भी बचाना है। इसलिए हमें शैक्षणिक सत्रों में भाग लेना चाहिए जैसे सेमिनार, परिचर्चा और दूसरे प्रतियोगी क्रियाकलाप जो धरती के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से संबंधित हो, हमें व्यवहारिक संसाधनों के द्वारा ऊर्जा संरक्षण के लिये लोगों को बढ़ावा देना होगा, लोगों को सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए आगे आना होगा ताकि प्रदूषण से पर्यावरण को बचाया जा सके क्योंकि पृथ्वी हमारा घर है, और घर को नष्ट नहीं करते। इस मौके पर पंजाब यूनिवर्सिटी खेल विभाग के उप-निदेशक डॉ. राकेश मलिक, यूआईईटी के प्रोफेसर हरीश गोयल, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. राकेश कुमार और राजपाल सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहें।