• 9/24/2018

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नागरिकता का कोई प्रमाणपत्र नहीं, जो देश में पैदा हो जाये वो नागरिक

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Bureau

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7/31/2017 1:05:08 AM

लखनऊः भारत को आजादी इंडियन फ्रीडम एक्ट 1947 बिल से प्राप्त हुयी है जो ब्रिटेन की पार्लियामेंट में पास हुआ था शायद यही कानून भारत सरकार को नागरिकता का प्रमाण जारी न करने के लिए बाध्य किये हो क्योकि आज भी हमारी संसद में दो एंग्लो इंडियन संसद होते हैं और इसीलिए कामनवेल्थ देश यानि सभी ब्रिटेन के गुलाम रहे देश एक दुसरे के देश में राजदूत नहीं रख सकते बल्कि हाई कमीशन नियुक्त करते हैं । यह कहना है उच्च न्यायालय लखनऊ अधिवक्ता अमित सचान का। अमित ने जारी है एक बयान में कहा कि उनको आरटीआई में जवाब देते हुए भारत सरकार नें बताया कि आधार कार्ड में लिखते हैं नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है, तो फिर नागरिकता का प्रमाण है क्या ? सरकार की मान्यता है कि जो भारत में पैदा हो जायेगा वो नागरिक माना जायेगा | पासपोर्ट, वोटरकार्ड, आधारकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि सिर्फ पहचान हेतु हैं | आरटीआई से जवाब मांगनें वाले उच्च न्यायलय के वकील अमित सचान नें कहा कि ऐसे में कई गंभीर सवाल ये है कि देश के तटवर्ती पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश आदि जहाँ से भारत आना बेहद आसान होता है उनके नागरिक आकर अस्पताल में प्रसव करते हैं वो भी भारत के नागरिक हुए, दो दशक पहले तक जन्म का न अस्पताल से कागज मिलता था न जन्म रजिस्टर की व्यवस्था थी फिर तत्कालीन जन्मे लोगों का नागरिकता प्रमाण कोई नहीं है जैसे एक मामला अभी सामने आया कि दो दशक पहले भारतीय बौध अनुयायी बैंकाक गए थे उनका पासपोर्ट खो गया पर वोटर कार्ड होने के बावजूद बैंकाक नें नागरिकता का प्रमाण नहीं माना और पिछले दो दशक से बैंकाक के जेल में हैं, कई घटनाएँ हुई जिसमें आतंकवादी और स्मगलर भारतीय पासपोर्ट बनवा लेते हैं, इसीलिए जनसँख्या मालूम नहीं सिर्फ अनुमानित है | चौंकानें वाला तथ्य ये है कि न सिर्फ भारत अपितु पकिस्तान सरकार नागरिकता प्रमाणित नहीं करना चाहती क्यूंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख़ुफ़िया जासूसों और आतंकवादियों के पास से अगर नागरिकता का प्रमाण बरामद होगा तो सरकारें उसे अपना नागरिक मानने से इनकार नहीं कर सकेंगी जो आज आसानी से करती हैं | परन्तु नागरिकता का परिणाम न जारी होनें का दुष्परिणाम ये है कि लाखों की तादात में नेपाली और बंगलादेशी नागरिक भारत में तमाम पहचान पत्र आसानी से पाते हैं और बिना वीजा के रह रहे हैं जिससे न सिर्फ अराजकता और अपराध बढ़ रहा है अपितु उनके किसी राष्ट्रप्रेम के बिना निवास करनें से उपजी आर्थिक व सामजिक समस्या भी दिन ब दिन बढ़ रही है, चुनाव में संरक्षण करनें वाले के सुझाये पक्ष में वोट डालकर चुनावी प्रक्रिया भी दूषित करते हैं और अक्सर समाचार पत्र के माध्यम से अक्सर जानकारी होती है कि सरकारी सेवाओं में भी कार्यरत हैं | विदित हो कि 2014 के आम चुनाव में हमेशा श्री नरेंद्र मोदी भाषण में बोलते थे कि मैं इधर प्रधानमंत्री की शपथ लूँगा उधर बंगलादेशी बोरिया बिस्तर बांध लें क्यूंकि अवैध रहनें वालों को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा पर शपथ लेकर सरकार बनें तीन साल हुआ पर देश से खदेड़ना तो दूर नागरिकता का प्रमाण तक नहीं देते निकालेंगे किस आधार पर, किसे और कैसे | हाई कोर्ट अधिवक्ता अमित सचान नें बताया कि संविधान के अनुच्छेद 84 में स्पष्ट कहा गया है कि चुनाव हेतु प्रत्याशी बनने के लिए देश का नागरिक और वोटर लिस्ट में नाम होना चाहिये इस आधार से तो आज़ादी से अब तक हमारे सांसद विधायक प्रधानमन्त्री आदि गैर सवैधानिक होंगे क्यूंकि सवाल खड़ा है कि नागरिकता का प्रमाण क्या दिया था प्रत्याशियों नें |