• 7/21/2018

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सभी खेलों का मूल, आधार है दौड़ : बुबका

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Varsha

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1/19/2018 12:35:50 AM

मुम्बई, 18 जनवरी। टाटा मुम्बई मैराथन-2018 के इंटरनेशनल एम्बेसेडर महान पोल वॉल्ट खिलाड़ी सर्गे बुबका ने गुरुवार को कहा कि दौड़ सभी खेलों के मूल में है और इसी से सभी खेलों का आधार तैयार होता है। टाटा मुम्बई मैराथन का आयोजन 21 जनवरी को होना है। बुबका ने मैराथन, अपने ओजस्वी करियर और एक खिलाड़ी के जीवन में ट्रेनिंग एवं फिटनेस के महत्व पर खुलकर चर्चा की। बुबका ने कहा, ‘‘दौड़ (रनिंग) सभी खेलों के मूल में है। यह सभी खेलों का आधार है। अगर हम पोल वॉल्ट की बात करें तो यह मूल रूप से एथलेटिक और जिमनास्टिक है। हमारी तैयारी का हर पक्ष दौड़ से जुड़ा होता है। हम डिस्टेंस रन, शॉर्ट रन तथा लांग एवं हाई जम्प का अभ्यास करते हैं। किसी भी खेल में सफलता हासिल करने के लिए एक खिलाड़ी को शारीरिक तौर पर पूरी तरह फिट होना होगा।’’ बुबका ने मैराथन की तैयारी पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, ‘‘अपने करियर को कदम दर कदम ढालना सबसे अधिक अहम होता है। खासतौर पर मैराथन में। यहां आपको अपनी तैयारी को एक-एक करते निर्धारित करना होता है। आपको मैच्योर होना होता है और एक मैराथन धावक को इसे पूरा करने के लिए महीनो तैयारी करनी होती है। टारगेट टाइम को हासिल करने के लिए एक फिटनेस रूटीन बनाना होता है और इसके लिए काफी मेहनत करनी होती है।’’ बुबका ने यह भी बताया कि एक धावक कैसे अपना रिकार्ड बना सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘आप अपनी कला को निखारते रहिए और साथ ही साथ गलतियों से बचते रहिए। साथ ही जब भी मौका मिले, बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश कीजिए और अपने दौड़ने के तरीके और अपनी कला को निखारने का प्रयास करते रहिए। अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक कोच का होना जरूरी है और साथ ही साथ उपयुक्त ट्रेनिंग प्रोग्राम का भी होना जरूरी है।’’ बुबका ने जब पोल वॉल्ट सीखी थी, उस वक्त को याद करते हुए कहते हैं, ‘‘उस समय एक ही पोल वाल्ट कोच था। स्टिक के साथ दौड़ना, कूदना और उड़ना अच्छा लगता था। मैंने साधारण तरीके से शुरुआत की। मैंने बेंच और एक टेबल पर से हवा में उड़ने की कोशिश की। मेरे कोच काफी इंटेलीजेंट और स्मार्ट थे। वह अच्छे इंसान थे और उन्होंने बड़े रोचक अंदाज में मुझे यह कला सिखाई। जब एक पोल वॉल्ट अच्छा करता है तो यह उसके साथ-साथ कोच की भी सफलता होती है। मैं खुशनसीब हूं कि मैंने जब शुरुआत की और जब टॉप पर पहुंचा, तब मेरा एक ही कोच था। मेरे जैसे शिष्य और मेरे कोच के लिए वह एक ड्रीम पार्टनरशिप था।’’ पोल वॉल्ट में 35 बार विश्व रिकॉर्ड कायम करने वाले 54 साल के यूक्रेन निवासी बुबका  उन 24 एथलीटों में शामिल हैं, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ के हॉल आॅफ फेम में रखा गया है। उन्होंने 1988 में सियोल ओलम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक भी जीता था। इसके अलावा, बुबका 2007 से ही एआईएफएफ में वरिष्ठ उपाध्यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं। वह यूक्रेन की राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के अध्यक्ष भी हैं। अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के सदस्य बुबका यूनेस्को के साथ चैम्पियन आॅफ स्पोर्ट के रूप में करीबी से काम कर रहे हैं।