• 9/24/2018

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मन-वचन-कर्म से एक रहने वाला इन्सान को ही होता है सभी सुख प्राप्त

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Preeti

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3/17/2018 11:00:55 PM

चण्डीगढ़ 17 मार्च। चतुर चालाकी करके दूसरों को मूर्ख बना कर धन दौलत इकट्ठी कर लेने वाले नहीं बल्कि मन-वचन-कर्म से एक रहने वाले इन्सान सभी सुख प्राप्त करते हैं, ये भाव आज यहां सेक्टर 30-ए में स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में हुए संयोजक लैवल के महिला निरंकारी सन्त समागम में यहां हज़ारों की संख्या में उपस्थित श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए यहां की महिला प्रचारक भगवान देवी नन्दवानी ने व्यक्त किए ।  मन-वचन-कर्म से एक होकर रहने के तरीके की चर्चा करते हुए नन्दवानी ने कहा कि यह कहना तो बहुत आसान होता है लेकिन इसे जीवन में अपनाना बहुत ही मुश्किल होता है इस सिद्घान्त पर केवल वही चल पाते हैं जो सत्गुरू माता सविन्द्र हरेदव जी की शरण में आकर सर्वव्यापी परमात्मा की पहचान करने के बाद हर समय इसका एहसास करते हैं । इससे उनके मन में हमेशा यह भय रहता है कि मेरे अन्दर और बाहर जो अन्तर्यामी परमात्मा है यह मेरे हर कर्म को चाहे वह लोगों को दिखाई दे रहा है या नहीं लेकिन इसे पता है । हर समय मन में इसका भय बना कर रखने वाला इन्सान मन-वचन-कर्म से भी एक हो कर अपनी जीवन-यात्र सुखमयी तरीके से तय कर जाता है ।  इस समागम में अन्य कई महिला श्रोताओं ने भी हिस्सा लिया जिसमें उन्होंने सन्त निरंकारी मिशन के पूर्व महात्माओं के जीवन की चर्चा करते हुए समझाया कि जब तक इन्सान सत्गुरू की शरण में नहीं आता उसके लिए जिन्द्गी दुखों से भरपूर रहती है जिसकारण वह हर समय निराश रहता है लेकिन ब्रह्म ज्ञान प्राप्ति के बाद सत्संग-सेवा-सिमरन से जुड़े हुए भक्त का जीवन सुखों से भरपूर होता है। इस समागम में मिशन के पुरातन भगत कोटूमल एवं जुगल किशोर के जीवन पर क्विज भी करवाई गई।