• 5/25/2018

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नोटा बटन बनें राईट टू रिजेक्ट, प्रत्याशी की फोटो हो चुनाव-चिन्हः अन्ना

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Swarnali dutta

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3/25/2018 9:22:49 PM

नई दिल्ली, 25 मार्च। अन्ना नें दिल्ली के रामलीला मैदान में सत्याग्रह के तीसरे दिन रामनवमी का महत्त्व बताकर आन्दोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र को प्रभावी करना है तो जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना होगा जो आज अपनी पार्टियों के प्रति जवाबदेह हैं। जनता को राईट टू रिजेक्ट का अधिकार मिले तो जनप्रतिनिधि दलप्रतिनिधि बनने के बजाये जनता, किसान, मजदूर के प्रति जवाबदेह हो जायेंगे और सरकारें दलहित के बजाये जनहित में काम करनें को बाध्य हो जाएँगी क्यूंकि उन्हें नोटा बटन के इस्तेमाल का भय रहेगा जो उनके चुनाव लडनें पर रोक लगाएगा, जिसके लिए नोटा बटन को राईट टू रिजेक्ट का अधिकार देना आवश्यक है। यह जानकारी मेम्बर, नेशनल कोर कमेटी के मीडिया प्रभारी प्रताप चंद्रा ने जारी एक विज्ञप्ति में दी है जिसमें अन्ना नें कहा कि चुनाव चिन्ह जनप्रतिनिधि को चुनने में एक सुविधा मात्र होती है, अब जबकि ईवीएम पर प्रत्याशी की फोटो लगनें लगी है तो चुनाव चिन्ह का मकसद समाप्त हो चुका है। जनप्रतिनिधी का चयन फोटो देखकर ही लोग कर सकते हैं, ऐसे में अब चुनाव चिन्ह ईवीएम से हटाया जाना चाहिये क्यूंकि इससे राजनीतिक भ्रष्टाचार, जनआकाँक्षाओं की उपेक्षा, प्रतिनिधियों की जनता से दूरी, शोषणकारी नीतियों, चंदा देनें वाले उद्योगपतियों के हित में नीतियाँ बनानें और सरकार के हुक्मशाही को बढ़ाता है जो लोकशाही में स्वीकार नहीं हो सकता है। जनांदोलन संविधान के तहत जनता को मिला हुआ मूल अधिकार है और आन्दोलन के दौरान मूलभूत जरूरतों को पूरा करनें का उत्तरदायित्व जनता द्वारा चुनी हुई सरकार का होता है लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार अनशनकारियों को ३ दिन गुजर जानें के बावजूद पानी उपलब्ध नहीं करा रही है और देश के विभिन्न राज्यों से आये हुए आन्दोलनकारी पानी को तरस रहे हैं जबकि पानी उपलब्ध करानें की जिम्मेदारी केजरीवाल सरकार की है क्यूंकि पानी उपलब्ध कराना उनके ही अंतर्गत आता है। उपेक्षाओं के बावजूद आन्दोलनकारियों के हौसले बुलंद हैं जबकि कल एक अनशनकारी की तबियत बिगड़ गई थी फिर भी आज और 240 आन्दोलनकारी अन्ना के समर्थन में अनशन पे बैठ गए। विदित हो कि इस अनशन में भारत के विभिन्न राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, केरल, तमिलनाडु, कर्णाटक, असम, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू और पंजाब से समर्थकों का भारी संख्या में आना जारी है। आन्दोलनकारियों के उत्साह से लगता है कि सरकार बहुत दिनों तक आन्दोलन के सामने अड़ियल रवैया नहीं अपना सकेगी।