• 5/25/2018

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शिक्षा विभाग को नींद से जगाने हेतु भारी रोष प्रदर्शन आयोजित

Preeti

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5/17/2018 12:45:59 AM

चंडीगढ़, 15 मई। नवनियुक्त शिक्षकों ने जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) के तत्वावधान में चंडीगढ़ के सेक्टर 25 स्थिति रैली मैदान में चंडीगढ़ शिक्षा विभाग को नींद से जगाने हेतु भारी रोष प्रदर्शन किया। इस अवसर पर 1200 शिक्षकों के साथ श्री रणजीत सिंह हंस (प्रेसिडेंट) यू.टी. सबऑर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन, श्री देवेन्द्र सिंह पूनिया (जेनेरल सेक्रेटरी)डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पंजाब, प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह (प्रेसिडेंट)डिस्ट्रिक्ट कॉउंसिल ऑफ पंजाब एंड चंडीगढ़ टीचर्स यूनियन आदि नवनियुक्त शिक्षकों को समर्थन देने हेतु उपस्थित थे।शिक्षक समुदाय ने चंडीगढ़ विद्यालय शिक्षा विभाग के NTT, JBT और TGT  शिक्षक भर्ती 2014-15 को रद्द करने के प्रस्तावित फैसले की कड़ी निंदा की। ज्ञात हो कि उक्त शिक्षक 2 वर्ष, 10 माह से विभाग में सेवारत हैं और इन सबका प्रोबेशन काल शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ ने गत वर्ष पुलिस थाना सेक्टर 11, चंडीगढ़ में दिनाँक 29.07.2016 को दर्ज FIR संख्या 128 के आधार पर जारी पत्र क्रमांक 4015-DSE-UTs2-11(170)-2016 दिनाँक 10 जुलाई 2017 के तहत बढ़ा दिया था। JAC के प्रधान भाग सिंह कैरों ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस द्वारा गठित SIT एवं माननीय राज्यपाल/प्रशासक, चंडीगढ़ द्वारा गठित छः सदस्यीय कमेटी द्वारा की गई भर्ती रद्द करने की सिफारिश माननीय न्यायालय में मुक़द्दमे की पैरवी के बिना लोकतांत्रिक नहीं हो सकती। आपने यह भी कहा कि 880 से अधिक प्रतिभाशाली शिक्षक भर्ती रद्द करने की अनुचित सिफारिशों के मद्देनजर अपनी सेवाओं की असुरक्षा और मानसिक तनाव की स्थिति और अवस्था से गुज़र रहे हैं। किसी भी निर्दोष शिक्षक को अपनी मासूमियत साबित करने का मौका दिए बिना किसी की सेवाओं का छीन लेना कहाँ का न्याय है? किसी को बिना किसी अपराध के सज़ा सुनना कहाँ का न्याय है? यह सीधे तौर पर भारत के संविधान में उल्लेखित मौलिक अधिकारों के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। संविधान के अनुच्छेद 311 में प्रदत्त है कि किसी भी व्यक्ति को उस पर लगे आरोपों के आधार पर उसे  तार्किक अवसर दिए बिना और बिना उसका पक्ष सुने और बिना निष्पक्ष जांच किए; न तो उसकी सेवाएं समाप्त कर सकते न उसका ओहदा घटा सकते। JAC के चैयरपर्सन श्री शविन्दर सिंह जी ने बताया कि भर्ती के बाद विभिन्न शिक्षकों ने शादी कर ली है और भर्ती रद्द करना ईमानदार शिक्षकों के प्रति अनुचित और निर्दयी कदम होगा। ये अनिर्णय के बड़े सदमे से कभी नहीं उभर पाएँगे और संभवतः किसी असामाजिक गतिविधि के शिकार न हो जाएं जो कि अन्याय और बेरोजगारी के घातक परिणाम हैं। ये बेहद संवेदनशील मुद्दा बेहद संजीदगी से हल किया जाना चाहिए।आपने आगे कहा कि ये ईमानदार और बेकसूर शिक्षक उच्च गुणवत्ता और स्नातकोत्तर, यूजीसी नैट, एम फिल पीएचडी जैसी शैक्षणिक योग्यता रखते हैं और इन्होंने NAS  जैसे राष्ट्रीय सर्वेक्षण में चंडीगढ़, यू टी को शिखर पा पहुँचाने में जी जान लगा दी। इसलिए ये अपनी सेवाओं में रहने के हकदार हैं। चूँकि विद्यालयों में पहले ही शिक्षकों की कमी है, इनके विरुद्ध लिया कोई नकारात्मक निर्णय राजकीय विद्यालयों के परिणाम को भी प्रभावित करेगा। इस निर्णय से बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 द्वारा निर्धारित शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात का भी उल्लंघन होगा। ऐसे में विद्यालय कैसे सुचारू रूप से चल पाएँगे, ये बहुत बड़ा प्रश्न है? JAC सचिव श्री रणवीर राणा ने उजागर किया कि विभिन्न शिक्षक पनियमित माद्यम के तहत अपने पूर्व विभाग से 2 वर्ष की लीन अवधि के तहत इस जॉब में आये थे जो अब समाप्त हो गया है। 427 शिक्षकों पर किए गए एक सर्वेक्षण के तहत  इन शिक्षकों में से 48% शिक्षक केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, पुलिस विभाग, महाविद्यालयों एवं अन्य सरकारी नौकरीयों से आये है जिनके लिये पूर्व सेवाओं में जाना असम्भव है। 58% शिक्षक सरकारी सेवाओं के लिए अपनी आयु सीमा खो चुके हैं। 33% शिक्षकों इस जॉब के आधार पर लोन ले रखा है और 15%शिक्षकों ने किसी भी जॉब को गत वर्षों ठुकराया है। JAC और शिक्षक कोर कमेटी जब उक्त मुद्दे पर माननीय सांसद, चंडीगढ़ श्रीमती किरण खेर नई से मिले तो आपने यह सकारात्मक संदेश दिया कि निर्दोष शिक्षकों के न्याय होगा और आप मुद्दे को माननीय चंडीगढ़ प्रशासक के सामने शिद्दत से रखेंगी। श्री जसविंदर सिंह ने कहा कि शिक्षकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई उनके परिजनों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी क्योंकि अधिकतर शिक्षक अपने परिवारों के पालक हैं। एक शिक्षक ने कहा कि हम शिक्षा विभाग की एफिडेविट देने को तैयार हैं कि यदि हम किसी भी पड़ाव पर दोषी सिद्ध हों तो हमारे खिलाफ कोई भी कार्रवाई की जा सकती है। इन शिक्षकों की ACR भी जाँची जा सकती है और पूर्व कार्यरत अद्यापकों से उनके नियुक्ति परीक्षा के माह के उपस्थित के प्रमाण माँगे जा सकते हैं, डॉ सरबजीत सिंह ने कहा। मंचासीन वक्ताओं और सब नवनियुक्त शिक्षकों ने हुँकार भरते हुए कहा कि यदि शिक्षा विभाग आवश्यक सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है तो आगामी रोष प्रदर्शन और ज़ोरदार होगा। हैम न्याय मिलने तक चुप नहीं रहेंगे।