• 6/23/2018

मुख्य खबर

Share this news on

घुमंतु, अर्ध घुमंतु को संवैधानिक संरक्षण देने की तैयारी में केंद्र सरकार

Manoj Sharma

/

6/8/2018 7:17:59 PM

चंडीगढ़, 8 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने खानाबदोश जनजातियों को संवैधानिक संरक्षण देने तथा इसके दायरे में आने वाले वाली 15 करोड आबादी को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए कमर कस ली है। आजादी के बाद इस समुदाय के लिए बडा बदलाव लाने की मुहिम अब तेज हो चुकी है। जिसमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा सभी प्रदेश सरकारों तथा इनके उत्थान से जुडे सभी महत्वपूर्ण मंत्रालयों से इदेट समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन को लेकर राय मांगी है। घुमंतु, अर्ध घुमंतु एवं विमुक्त जनजाति विकास आयोग का गठन कर चुकी हरियाणा सरकार ने भी संबंधित महकमों को अपनी राय शीघ्र देने के निर्देश दे दिए हैं। यहां बता दें कि देश में विमुक्त, घुमंतु जनजातियों की 15 करोड आबादी आज भी सामाजिक न्याय पाने की जद्दोजहद में लगी हुई है। पूर्व सरकारों के दौरान मिले आश्वासनों के जमीनी स्तर पर नहीं उतर पाने से क्षुब्ध इस समुदाय के लोगों की पीडा को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ-सबका विकास तर्ज पर उनके उत्थान के लिए प्रयास शुरू किए। उनके निर्देश के बाद दादा इदाते कमीशन का गठन किया गया, जिसने कुछ समय पहले ही इन जातियों के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक व आवासीय विकास की सिफारिशों के साथ केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। उनकी सिफारिशों के आधार पर खानाबदोश समुदाय को मुख्य धारा में लाने के लिए अब प्रक्रिया तेज हो गई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संवैधानिक मान्यता प्रदान करने की दिशा में कदम बढाते हुए 22 केंद्रीय मंत्रालयों, विभिन्न आयोगों तथा इन जनजातियों वाले 22 राज्यों की सरकार तथा केंद्र सरकार के थिक टैंक को पत्र जारी करते हुए इदाते कमीशन की सिफारिशों पर टिप्पणी और रायशुमारी मांगी है। इसमें महत्वपूर्ण बिंदु इस समुदाय को अनुसूचित जातियों और अनुसूचितजनजातियों के लिए बनी अनुसूची के बाद अलग से तीसरी अनुसची के तहत संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने, नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण, अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध, भीकू रामजी इदाते की अध्यक्षता वाली समिति के अनुरूप सर्वाधिक वंचित अन्य समुदायों को भी डीएनटी, एनटी, एसएनटी में शामिल करने से लेकर गृह, स्वास्थ्य, कानून, मानव संसाधन विकास, संस्कृति, ग्रामीण विकास एवं आवास के मुद्दे पर राय मांगी गई है। मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग से भी इनके उत्थान के संबंध में टिप्पणी आमंत्रित की गई हैं। घुमंतु, अर्धघुमंतु विकास बोर्ड के चेयरमैन डॉ बलवान सिंह की मानें तो प्रदेश सरकार इस समाज के उत्थान के लिए पहले से ही प्रयासरत है। इस समुदाय की पहचाने के लिए बोर्ड, सरकार द्वारा राशन कार्ड बनवाने के लिए विशेष कैंप लगाने का निर्णय लिया जा चुका है, जबकि पूर्व में मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा घुमंतु समाज के बच्चों के शैक्षिक उत्थान के लिए पांच हास्टल बनाने, आदतन अपराधी एक्ट खत्म करने, एससीध्एसटी मे शामिल करने के लिए विशेष सर्वे, बेघर लोगों को स्थाई आवास के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के दायरे में लाने तथा सरकारी नौकरियों के लिए आरक्षण की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार एवं घुमंतु, अर्ध घुमंतु जनजाति कल्याण की सलाहकार समिति के चेयरमैन राजीव जैन का कहना है कि हरियाणा सरकार की मंशा है कि घुमंतु समुदाय के लोगों को बराबरी का हक शीघ्र मिले। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा सिफारिशों पर मांगी गई राय को जल्द ही तैयार करवाकर भिजवाया जाएगा, इसके लिए खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल गंभीर है और उनके जुडी सभी योजनाओं की निजी तौर पर निगरानी कर रहे है।