• 12/14/2018

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ट्राईसिटी प्लानिंग बोर्ड स्थापित करने संबंधी खट्टर के सुझाव को केप्टन ने किया रद्द

Varsha

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7/10/2018 9:19:19 PM

चंडीगढ़, 10 जुलाई। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने मंगलवार को हरियाणा के अपने समकक्ष द्वारा चंडीगढ़ और साथ लगते शहरों पंचकुला और मोहाली के लिए ट्राईसिटी योजनबन्दी बोर्ड स्थापित करने के सुझाव को शुरू से रद्द करते हुए कहा कि चंडीगढ़ यकीनी तौर पर पंजाब का हिस्सा है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सख्त स्टैंड लेते हुए कहा कि खट्टर के प्रस्ताव के साथ सहमत होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। इस मामले पर पंजाब के राज्यपाल वी.पी.एस. बदनौर ने भी यह कहते हुए हिमायत की कि तीनों शहरों के विकास से संबंधित मामलों पर पहले ही तालमेल होता रहता है। मुख्यमंत्री ने यहां एक समागम में सवालों के जवाब देते यह प्रगटावा किया। इस मौके पर बदनौर के अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री एम.एल. खट्टर, इंस्टीच्युूट फॉर डिवैलमैंट एंड कम्यूनीकेशन के चेयरमैन प्रमोद कुमार ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ मंच सांझा किया। राज्यपाल ने यह नुक्ता उभारा कि यह क्षेत्र चारों तरफ से ज़मीन के साथ घिरा हुआ होने के कारण चंडीगढ़ का विस्तार होने की कोई गुजायश नहीं है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पंजाब, राजधानी से बिना अकेला राज्य होने के कारण इसका चंडीगढ़ पर ऐतिहासिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि पिछले समय में विभिन्न समय हुए इकरारनामों में चंडीगढ़, पंजाब को दिया गया परंतु बदकिसमती से इसको व्यवहारिक रूप नहीं मिला। पंजाब के लिए राजधानी की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संभव तौर पर विश्व में पंजाब ही कि ऐसा राज्य है जिसकी अपनी राजधानी नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा एक नया राज्य होने के कारण अपनी राजधानी स्थापित करने में उसकी सहायता की जानी चाहिए और चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी के तौर पर पंजाब को दे देना चाहिए। कैप्टन अमरिन्दर सिंह और बदनौर ने समुची ट्राईसिटी को पंजाब और हरियाणा की राजधानी के तौर पर नेशनल कैपिटल रीजन (एन.सी.आर.) की तरह ग्रेटर चंडीगढ़ मेट्रोपोलिटन रीजन बनाने के सुझाव को भी रद्द कर दिया। बदनौर जो चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं, ने कहा कि दोनों राज्यों और यू.टी. के मध्य विभिन्न मुद्दों पर पहले ही तालमेल होता है और मोहाली और पंचकुला से ओर लोगों की हिस्सेदारी बढ़ा कर सलाहकारी कौंसिल को और मज़बूत बनाया जा सकता है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि और मुद्दे उठाने से पहले पंजाब और हरियाणा के मध्य क्षेत्रीय और पानियों के मुद्दे हल होने चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के लिए पानियों का मुद्दा बहुत गंभीर है क्योंकि भूमिगत पानी का स्तर तेज़ी से गिर रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पास दोनों राज्यों की सिफऱ् 40 प्रतिशत ज़मीन होने के बावजूद अधिक पानी है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि अकालियों ने अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेकने के लिए पंजाब की विभाजन कर दिया। उन्होंने कहा कि इस विभाजन ने पंजाब का बहुत नुक्सान किया है जिस कारण आज राज्य पानी और नशों सहित बहुत सी समस्याओं का सामना कर रहा है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने समागम में एक दर्शक की तरफ से पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने के लिए रखे सुझाव को रद्द कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने यूनिवर्सिटी को चलाने के लिए श्री खट्टर द्वारा योगदान डालने की की गई पेशकश भी ठुकरा दिया। उन्होंने ताना मारते कहा,‘‘पंजाब के हिस्से क्या रह जायेगा।’’ उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब को दोनों राज्यों के मध्य पिछले समय में हुए संसाधनों के बटवारे का घाटा पहले ही भुगतना पड़ा है जिस कारण हरियाणा को और स्रोत नहीं दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ यू.टी. द्वारा प्रशासन में पंजाब की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी को ह्रास पहुंचा कर अपना काडर कायम करने का मुद्दा भी उठाया। इस संदर्भ में राज्यपाल ने चंडीगढ़ में कर्मचारियों के आडिट करवाने के आदेश देने की पेशकश की जिससे पंजाब और हरियाणा के मध्य 60:40 के अनुपात को यकीनी बनाया जा सके। पारस्परिक हित वाले इलाकों में दोनों राज्यों के मध्य सहयोग बढ़ाने की वकालत करते हुए राज्यपाल ने एक इंडिया इंटरनेशनल सैंटर जैसा सैंटर चंडीगढ़ में स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इसके लिए पंजाब और हरियाणा से भी योगदान डालने की माँग की जायेगी।