• 12/14/2018

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सद्गुरु माता सुदीक्षा ने ईश्वर की रज़ा मानने का किया आह्वान

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Preeti

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8/9/2018 9:45:08 PM

चण्डीगढ, 9 अगस्त। निरंकारी माता सविंदर हरदेव जी के अंतिम संस्कार के पश्चात् प्रेरणा दिवस मनाया गया और बुराड़ी रोड स्थित, ग्राउंड नं.8 में एक विशाल सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें उन्हें न केवल भरपूर श्रद्धांजलि अपर्ति की गई बल्कि उनके जीवन तथा शिक्षाओं से प्रेरणा भी ली गई। समारोह की अध्यक्षता करते हुए सद्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि आज के इस प्रेरणा दिवस पर हम एक ऐसी माँ को याद कर रहे हैं जो न केवल हम तीन बच्चों की माँ थी बल्कि पूरी संगत की माँ थी। उन्होंने हमेशा सभी को प्यार तथा स्नेह प्रदान किया। सद्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि इस माँ ने हमें इतना कुछ दिया कि आज उनके लिए सभी भावुक हो सकते हैं परंतु उन्होंने हमें बचपन से ही निरंकार से जुड़ने की शिक्षा दी। वे कहते थे कि परिस्थिति कोई भी हो, यदि हम निरंकार पर छोड दें तो यह सम्भालेगा, हमारी समस्याओं का समाधान करेगा। माता सुदीक्षा ने कहा कि आज बहुत से भक्तों को आँखों में आँसू लिए देखा मगर वहीं ऐसे भी भक्त थे जिनकी आँखें तो भरी हुई थी पर चेहरे पर मुस्कुराहट लिए मेरी ओर देख रहे थे। एक समय पर मैं भी कुछ भावुक हो रही थी परंतु इन भक्तों को देखकर मन में ठहराव आ गया क्योंकि मुझे अहसास हो गया कि इन्होंने इसे निरंकार की मंज़ूरी मान लिया है। मुझे यही लगता था कि इन्हें निरंकार के ऊपर जो पूर्ण विश्वास है, उसी के परिणाम स्वरूप इनके चेहरों पर मुस्कान की झलक मिल रही है। इससे मुझे भी अंदर से मजबूती मिल रही थी। माता सुदीक्षा ने आगे कहा कि सांसारिक रूप में तो जिसके माँ-बाप नहीं रहते, उसे अनाथ कहा जाता है। परंतु यहाँ तो सद्गुरु की कृपा से हमें निरंकार रूप में पिता और साध संगत के रूप में माँ मिली हुई हैं। अतः यहाँ हम कोई भी, कभी भी नहीं कह सकते कि हम अनाथ हो गए हैं। सद्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि माता सविंदर हरदेव जी महाराज ने सद्गुरु रूप में हमें बहुत कुछ सिखाया और बहुत कुछ करने को बताया। अतः आज हमारा यही कर्त्तव्य बनता है कि हम उनके आदेश-उपदेश को याद करें और जो काम अधूरे रह गए हैं उन्हें मिलजुल कर पूरा करने का प्रयास करें। विशाल सत्संग कार्यक्रम जो 7 घण्टे से भी अधिक समय तक चला, अनेक प्रबंधक और प्रचारक महापुरूषों ने माता सविंदर हरदेव जी को भरपूर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन तथा शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि माता जो कहते थे वह करके भी दिखाते थे। अतः हम उनके जीवन से कदम-कदम पर प्रेरणा लेकर अपने जीवन को संवार सकते हैं और दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। समारोह में गुरु परिवार तथा उनके संबंधी महापुरूषों ने भी अपने-अपने भाव व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान एक लघु कवि-सम्मेलन भी हुआ।