• 12/4/2020
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असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है विजयादशमी का पर्व: मंजू मल्होत्रा फूल

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Preeti

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10/23/2020 2:47:57 PM

चंडीगढ़, 23 अक्टूबर । असत्य पर सत्य एवं बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। मंजू मल्होत्रा फूल का मानना है कि यह पर्व हमें दस प्रकार के पापों -काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, द्वेष, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा देता है। हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीराम मां दुर्गा के अनन्य भक्त थे। उन्होंने युद्ध के दौरान नौं दिनों तक मां दुर्गा की पूजा एवं उपासना की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया। श्रीराम जी की विजय के प्रतीक के रूप में इस पर्व को विजयादशमी कहा जाता है। दुर्गा पूजा के रूप में भी यह शक्ति पूजा, शस्त्र पूजन, हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। हमारी संस्कृति सदैव ही वीरता और शौर्य की समर्थक रही है, दशहरे का उत्सव शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। नौं दिन मां जगदंबा के नौ स्वरूपों की पूजा उपासना और उन्हीं नौं दिनों में रामलीला का जगह-जगह मंचन, जहां शिव पार्वती संवाद के साथ मंच पर धीरे-धीरे रामकथा की भावभूमि तैयार होनी शुरू होती है। जब प्रभु शिव माता पार्वती को राम जन्म का हेतु बताते हुए कहते हैं - राम जन्म के हेतु अनेका। परम विचित्र एक तें एका।। जब-जब होई धरम कै हानि। बाढ़हि असुर अधम अभिमानी ।। तब -तब प्रभु धरि विविध शरीरा । हरहि कृपानिधि सज्जन पीरा।। अर्थात -हे पार्वती, जब-जब धर्म की हानि होती है और नीच अभिमानी असुर बढ़ जाते हैं , कृपानिधि श्रीहरि अनेक प्रकार का शरीर धारण कर भक्तों की पीड़ा हरते हैं। धीरे-धीरे प्रतिदिन के साथ रामायण की कथा बढ़ती चली जाती है और अंतिम दिन कुंभकरण, मेघनाथ और रावण का वध करके प्रभु श्रीराम का पृथ्वी से भार हरण करने के साथ समाप्त होती है। हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी दुर्गा ने भी इन्हीं नौं दिनों में महिषासुर से संग्राम करने के पश्चात दसवें दिन उसका वध किया और महिषासुरमर्दिनी कहलाई। इन्हीं नौं दिनों में दुर्गा पूजा का त्यौहार तथा दसवां दिन विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। भगवान श्री राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में देश भर में मनाया जाता है। हमें भी इस दिन अपनी समस्त बुराइयों को छोड़ने का प्रण लेना चाहिए। आज के परिवेश में जब प्रतिदिन हम क्रूर घटनाओं के विषय में सुनते रहते हैं, यह अत्यावश्यक है कि हम यह प्रण ले कि समस्त बुराइयों एवं अवगुणों का त्याग करेंगे और असत्य की राह छोड़कर सत्य के पथ पर सदैव अग्रसर होंगे।