• 12/4/2020
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आत्मनिर्भर भारत पर चितकारा यूनिवर्सिटी में हुई लीडरशिप टॉक

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Neeraj

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11/21/2020 8:26:10 PM

चंडीगढ़, 21 नवंबर । चितकारा यूनिवर्सिटी में आत्मनिर्भर भारत विषय पर आज एक लीडरशिप टॉक का आयोजन किया गया जिसमें उद्योग जगत की जानी मानी हस्तियों और सरकार के शीर्षस्थ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और अपने ज्ञान और अनुभव का प्रसार किया। यह लीडरशिप टॉक भारत को आत्मनिर्भर बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान की पृष्ठभूमि में ज्ञान के प्रसार प्रचार के जरिए राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने की चितकारा यूनिवर्सिटी के सतत प्रयासों का नतीजा है। इस लीडरशिप टॉक में उद्योग जगत की जानी मानी हस्तियों को बुलाया गया था ताकि वे इंडस्ट्रियल आउटपुट, स्किल एनेबलमेंट व सर्विस सेक्टर की ग्रोथ के जरिए आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने रोडमैप को पेश कर सकें। उद्योग जगत की इन हस्तियों ने चुनौतियों, अवसरों और परिवर्तन के बारे में अपने विचारों को 'लीडरशिप पैनल डिसकशन के जरिए पेश किया। सरकार द्वारा भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए घोषित किए गए आर्थिक पैकेज, नीतियों की पृष्ठभूमि में इस पैनल डिसकसन का आयोजन किया गया। पैनल डिसकसन में इनफ्रस्ट्राक्चर्स, आटोमोबाइल, सर्विस सेक्टर, इंडस्ट्री एसोसिएसन व मिनिस्ट्री आफ इलेक्ट्रानिक्स एंड इनफारमेशन के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। पैनल को अमित गोसाईं (प्रबंध निदेशक, कोन एलेवेटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड), ए.एस. सुब्रमण्यन (वीपी- सेल्स, स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर्स, सीमेंस इंडिया), डॉ गणेश मणि (निदेशक, हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड), श्रीराम रामकृष्णन (प्रबंध निदेशक, फ़ूजी इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड), संजीव मल्होत्रा (सीईओ, नैसकॉम सीओई), मुस्तफा वाजिद (प्रबंध निदेशक, मेहर समूह), और अजय गौर (वरिष्ठ निदेशक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) आदि ने संबोधित किया। पैनल के सदस्यों ने इस तथ्य पर सहमति व्यक्त की कि आत्मनिर्भर भारत की पहल निश्चित रूप से गेम चेंजर हैं और यह उद्योगों और नागरिकों के लिए असंख्य चुनौतियां और अवसरों को लेकर आया है। यह पहल उच्चतर शिक्षा क्षेत्र और कौशल विकास क्षेत्र पर दूरगामी परिणाम डालेगी और और इन क्षेत्रों के पास हासिल करने के लिए बहुत कुछ रहेगा। देश के निर्माण में अपना योगदान देने के लिए मौकों पर विचार करने के लिए एक शानदार मंच प्रदान करने के लिए पैनल ने आयोजकों की सराहना की। विशेषज्ञों ने चितकारा यूनिवर्सिटी के छात्रों को सलाह भी दी कि वे इस मिशन क्रिटिकल आब्जेक्टिव के जरिए ज्यिादा से ज्यादा फायदा उठा सकते हैं जो कि भारत दुनिया के लिए स्किल्ड टेलेंट पूल के रूप में निर्मित कर सकें। इस मौके पर चितकारा यूनिवर्सिटी के चांसलर डाक्टर अशोक चितकारा ने देश निर्माण मिशन के कठिन लक्ष्य की प्राप्ति के लिए इस चर्चा के लिए एक साथ आने के लिए पैनल के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि "जब भारत आत्मनिर्भर बनने की बात करता है, तो वह आत्म-केंद्रित प्रणाली की वकालत नहीं करता है। भारत की आत्मनिर्भरता में, पूरे विश्व की खुशी, सहयोग और शांति के लिए चिंता है। उन्होंने कहा कि चितकारा यूनिवर्सिटी प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के मिशन को पूरा समर्थन देता हैऔर हम वही करते रहेंगे जो हम सर्वश्रेष्ठ तरीके से करते हैं। हम उद्योग के नेताओं और उद्योग जगत की मदद से ज्ञान प्रसार के अवसर पैदा करते रहेंगे। हम उन पाठ्यक्रमों की पेशकश करते रहेंगे जो उद्योगों की हस्तियों के साथ मिलकर तैयार किए गए हैं ताकि हम देश के निर्माण में योगदान देने वाले प्रोफेशनल को पैदा करते रहें।